Gii 1.41: различия между версиями
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| − | अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः ।<br /> | + | <div class="muulam"> अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः ।<br /> |
| − | स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥ [[Gii_1.41|१-४१]]॥ | + | स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥ [[Gii_1.41|१-४१]]॥ </div> |
Версия от 17:00, 11 марта 2018
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः ।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥ १-४१॥
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥ १-४१॥