Gii 11.29: различия между версиями
Перейти к навигации
Перейти к поиску
Ashutosh (обсуждение | вклад) м (Замена текста — «॥ \[\[Gii_([0-9]+\.[0-9]+)(.*)]]॥» на «॥ <span class="shloka-num">Gii_$1$2</span>॥») |
Ashutosh (обсуждение | вклад) м (Замена текста — «( | )*(।|॥)» на « $2») |
||
| Строка 1: | Строка 1: | ||
<div class="muulam"> यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा | <div class="muulam"> यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा | ||
| − | विशन्ति नाशाय | + | विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः ।<br /> |
तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्- | तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्- | ||
| − | तवापि वक्त्राणि | + | तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः ॥ <span class="shloka-num">[[Gii_11.29|११-२९]]</span> ॥ </div> |
Текущая версия от 01:51, 20 марта 2018
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा
विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः ।
तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्-